न्यूटन के गति के नियम
आज हम आपको न्यूटन के गति के नियम व उदाहरण बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके आने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होगीं।जैसे:- Patwari, Police, SSC, Railway, Banking, UPSC, UPPCS, RPSC, Police, SI & Others में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। तथा प्रतियोगी छात्र परीक्षा की दृष्टि से आवश्यक जानकारी से परिचित हो सके ।
“महान वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन(sir Issac Newton,1642-1727) ने गति के अध्धयन के आधार पर गति के तीन नियमों की 1679 ई. में सूचित किआ जो यांत्रिकी के आधारित नियम है”|
न्यूटन के गति के नियम
प्रथम नियम :- एक वस्तु अपनी स्थिरावस्था /विरामावस्था में बनी रहती है या सरल रेखा में एकसमान वेग से गति करती है जब तक उस पर कोई बाह्य परिणामीबल कार्यरत न हो | इसे ही गति का प्रथम नियम कहते है | इस नियम को ही जड़त्व का नियम भी कहते है |
जड़त्व(Inertia) :- जड़त्व से तात्पर्य है – परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध
- द्रव्य के उस गुण की जिसके कारण वह अपनी स्थिरावस्था या गत्यावस्था में परिवर्तन का विरोध करे , जड़त्व कहते है |
- इटैलियन वैज्ञानिक गैलिलियो ने जड़त्व के सिध्दांत की खोज की |
- जिस वस्तु का द्रव्यमान ज्यादा होता है, उसका जड़त्व उतना ही ज्यादा होगा |
जड़त्व के कुछ उदाहरण :-
- चलती हुई गाड़ी के अचानक रुकने पर उसमे बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते है तथा रुकी हुई गाड़ी का अचानक चलने पर उसमे बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते है |
- गर्द लगे कंबल/दरी को जब लटकाकर डंडे से प्रहार किया जाता है, तो धुल के कण कंबल/दरी से अलग हो जाते है |
- फल लगे पेड़ की डाल को जब हिलाते है, तो उससे फल गिरने का कारण स्थिर अवस्था का जडत्व है |
न्यूटन के गति का दूसरा नियम :-
वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए हुए बाहरी बल के समानुपात होती है तथा उसी दिशा में होती है , जिसमें बाहरी बल लग रहा है
संवेग एक सदिश राशि है |
प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु पर अन्योन्य क्रिया के कारण बल लगती है अन्य शब्दों में जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाकर प्रभावित करती है तो ये कहा जाता है की पहली वस्तु तथा दूसरी वस्तुओं के बीच अन्योन्य क्रिया है (बल = द्रव्यमान *त्वरण)
न्यूटन के गति का दूसरा नियम के कुछ उदाहरण:-
- कराटे खिलाड़ी द्धारा हाथ कर प्रहार से ईट को तोड़ देना |
- ठोस वस्तु की तुलना में नरम वस्तु पर गिरने पर कम चोट लगती है |
- गाडियों में स्प्रिंग और शोकर एब्जाबर्र का लगाया जाना ताकि झटका कम लगे |
न्यूटन के गति का तीसरा नियम :-
प्रत्येक क्रिया की उतनी ही किन्तु विपरीत प्रतिक्रिया होती है क्रिया और प्रतिक्रिया सैदेव दो विभिन्न वस्तुओ पर कार्य करता है क्रिया और प्रतिक्रियाक एक ही साथ कार्यरत होती है | इस नियम को संवेग की अविनाशिता या संवेग संक्षरण का नियम भी कहते है|
संवेग संक्षरण का नियम :- यदि दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय पर कोई बाह्य बल आरोपित न हो तो संयुक्त निकाय पर संवेग परिणाम एवं दिशा में नियत रहता
न्यूटन के गति का तीसरा नियम के कुछ उदाहरण:-
- कुए से पानी खीचते समय यदि रस्सी टूट जाये तो आदमी पीछे की और गिर जायेगा |
- घोड़ा गाड़ी को जितने बा से खींचता है गाड़ी भी उतना ही बल पीछे की ओर लगती है |
- बन्दुक से गोली चलने पर चलाने वाले को पीछे की धक्का लगना |
- रोकेट का आगे बढना |
- पानी में तैराक द्धारा आगे बढने के लिए हाथो और पैरो से पानी को पीछे की और धकेलना |
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